बुज़ुर्ग माता-पिता के लिए पारिवारिक केयर प्लान कैसे बनाएँ
चिंता और नेक इरादों को एक लिखित पारिवारिक केयर प्लान में बदलने का क़दम-दर-क़दम तरीक़ा, जिसे माता-पिता समेत हर कोई देख और अपना सके।
नई बीमारी का पता चलने पर अक्सर यह बदल जाता है कि माता-पिता अकेले क्या-क्या कर सकते हैं। बड़े फैसले लेने से पहले, रोज़मर्रा की ज़रूरतों की वास्तविक स्थिति का आकलन करें, अपॉइंटमेंट के लिए अच्छी तैयारी करें और माहौल शांत हो तब ज़रूरी दस्तावेज़ ढूँढ़ लें।
इस स्थिति के लिए पहले से तैयार 9 काम मुफ़्त केयर स्पेस में जोड़ें। इसमें उचित तारीखें, रिमाइंडर और पूरे परिवार के लिए जगह शामिल है।
आँकें कि रोज़मर्रा के कामों में आपके रिश्तेदार को कितनी मदद चाहिए और परिवार, डॉक्टरों या देखभाल एजेंसियों के साथ साझा करने के लिए एक साफ़-सुथरा सारांश पाएँ।
रोज़मर्रा की उन क्षमताओं पर टिक करें जिनके लिए अब मदद की ज़रूरत है, ताकि पता चल सके कि यह आम तौर पर डिमेंशिया के किस चरण से मेल खाता है और आगे के लिए क्या तैयारी करनी है।
रोज़मर्रा की गतिविधियों के आधार पर अंदाज़ा लगाएँ कि किसी व्यक्ति को दिन या हफ़्ते में कितने घंटे मदद की ज़रूरत है।
अपने रिश्तेदार के ज़रूरी दस्तावेज़ ढूँढ़ें और लिखें कि वे कहाँ रखे हैं—पहचान-पत्र, बीमा संबंधी काग़ज़ात, पावर ऑफ़ अटॉर्नी, वसीयत, बैंक और चिकित्सा संबंधी जानकारी। ऐसा आपातकाल में उन्हें ढूँढ़ने की नौबत आने से पहले करें।
देखभाल की मुलाक़ात का साफ़-सुथरा, प्रिंट करने योग्य रिकॉर्ड बनाएँ: किए गए काम, देखी गई बातें और परिवार के लिए एक नोट।
हर दिन का एक पेज — खाने-पीने, गतिविधियों, किए गए कामों और अगले व्यक्ति के लिए नोट्स के लिए।
फ़ोन के पास या फ़्रिज के दरवाज़े पर रखने के लिए नाम, नंबर और ज़रूरी जानकारी।
पूछने के सवाल, बताने लायक बदलाव और साथ ले जाने की चीज़ें — साथ ही, कही गई बातों के लिए जगह।
बीमारियाँ, ऑपरेशन, एलर्जी और विशेषज्ञ डॉक्टर—सब एक पन्ने पर।
एक पन्ने की प्रोफ़ाइल, ताकि नए देखभालकर्ता और अस्पताल का स्टाफ़ व्यक्ति को जान सकें, सिर्फ़ मरीज़ को नहीं।
चिंता और नेक इरादों को एक लिखित पारिवारिक केयर प्लान में बदलने का क़दम-दर-क़दम तरीक़ा, जिसे माता-पिता समेत हर कोई देख और अपना सके।
यह जानने का चरण-दर-चरण तरीका कि रोज़मर्रा के कामों में माता-पिता को कितनी मदद की ज़रूरत है और देखभाल की योजना बनाने के लिए इस जानकारी का इस्तेमाल कैसे करें।
वे दस्तावेज़ जिनकी परिवारों को अक्सर तुरंत ज़रूरत पड़ती है, उन्हें शांति से कैसे ढूँढ़ें और व्यवस्थित करें, और उन्हें सुरक्षित व अपडेट कैसे रखें।